फीस में छूट नहीं, अभिभावक परेशान

फतेहपुर : एक ओर सरकार नया फीस अध्यादेश लाने का एलान कर रही है तो दूसरी ओर प्रवेश के चलते अभिभावकों की जेब खाली हो रही है। प्रतिमाह फीस की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं तो नामी गिरामी से लेकर अदने से स्कूल-कॉलेज में से¨टग-गे¨टग करके किताब, कॉपी, ड्रेस आदि में लूट मचा रखी है। प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार और प्रशासन तब जागेगा जब प्रवेश कराकर आम जनमानस लुट जाएगा। 10 अप्रैल को आ रहे नए फीस अध्यादेश की ओर अभिभावक राहत भरी नजरों से देख रहे हैं तो कॉलेज प्रबंधक इसे आफत मानकर चल रहा है।

जिले में खुले निजी विद्यालयों की बात करें और उन्हें ए,बी,सी श्रेणी में बांट कर देखें तो हर जगह अलग अलग शुल्क अदा करना पड़ रहा है। शिक्षा की शुरुआती कक्षा में पीजी ने 600 से 900 रुपये फीस ली जा रही है। इसी तरह उनका बस्ता 3,000 से 5,000 में बंट रहा है। प्रवेश के समय तमाम मदों के लिए अभिभावकों को 5,000 से 20,000 रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। इसी क्रम में जहां फीस बढ़ोत्तरी की जाती हैं वहीं प्रवेश के लिए बढ़े शुल्क को अदा करना पड़ता है। फीस और प्रवेश के साथ ही ड्रेस में खेल खेला जा रहा है। कई विद्यालय कैंपस से ड्रेस बांट रहे है तो दुकानों में से¨टग कर रखी है। एक ड्रेस 500 से 600 रुपये में बेचा जा रहा है। ना नुकुर के साथ कॉलेज के दबाव के आगे प्रवेश सहित तमाम शुल्क अभिभावक अदा कर रहे हैं। वहीं प्रशासन के खिलाफ लोगों दिलों में गुस्सा भरा हुआ है। कॉलेज प्रशासन भी बचाव के रास्ते अख्तियार कर कमाई के काम में लगे हुए हैं। अध्यादेश का स्वागत

नए अध्यादेश का स्वागत करते हैं लेकिन उसे इन प्राइवेट संस्थानों को ग्रांट देने की भी सोच रखनी होगी। गुणवत्तापरक शिक्षा एवं सुविधाओं के चलते अभिभावक अपने पाल्यों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए प्रवेश दिलाते हैं। सरकारी शिक्षक को 60 से 80,000 रुपये देती है तो प्राइवेट शिक्षकों को भी दे। -एके मिश्रा, प्रधानाचार्य महर्षि विद्या मंदिर सीनियर सेकेंड्री स्कूल। बेहतर शिक्षा का लेते शुल्क

अगर प्राइवेट स्कूल सुविधाएं एवं बेहतर शिक्षा देकर शुल्क लेते हैं तो इसमें क्या हर्ज है। सरकार के नए अध्यादेश के पारित होने से फीस निर्धारण में दखल दिया गया तो शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित होगी। संस्थान सस्ते शिक्षक रखने को मजबूर होंगे। -राकेश त्रिवेदी, प्रबंधक सरस्वती बाल मंदिर, रघुवंशपुरम निजी स्कूलों को करेगा बर्बाद

जिस तरह से फीस लेने में ज्यादती ठीक नहीं है उसी तरह सुविधा संपन्न एवं पढ़ाई में कीर्तिमान स्थापित कर चुके शिक्षण संस्थानों पर ज्यादती उचित नहीं है। बिना धन खर्च किए कोई भी चीज अच्छी नहीं मिलती है फिर हम फीस को लेकर इतना अधिक क्यों बवंडर बनाए हुए हैं। नए अध्यादेश का हम स्वागत करते है। – विनय प्रताप ¨सह, प्रधानाचार्य जय मां सरस्वती ज्ञान मंदिर राधानगर खर्चो को भी देखे सरकार

सरकारी स्कूलों में जहां समस्याएं ही समस्याएं हैं वहीं निजी स्कूल खुद की पाकेट से सुविधाओं और क्वालिटी पूर्ण शिक्षा दे रहे हैं। नए अध्यादेश में बंदिशें लगाईं तो वह दिन दूर नहीं जब नामी गिरामी स्कूल संस्थानों में ताला लगा देंगे। फीस के साथ संस्थान के खर्चों को भी सरकार को देखना चाहिए। -मोपाली मिश्रा, प्रधानाचार्य चिल्ड्रेन पब्लिक स्कूल चित्रांश नगर।

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